अध्याय सूची

विभूतियोग

विभूति योग

सारांश

अर्जुन कृष्ण से अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन करने के लिए कहते हैं। कृष्ण ब्रह्मांड में अपनी अनंत अभिव्यक्तियों का वर्णन करते हैं।

श्लोक 8

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते । इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः ॥

ahaṃ sarvasya prabhavo mattaḥ sarvaṃ pravartate | iti matvā bhajante māṃ budhā bhāva-samanvitāḥ ||

मैं समस्त आध्यात्मिक तथा भौतिक जगतों का कारण हूँ, प्रत्येक वस्तु मुझसे ही उद्भूत है। जो बुद्धिमान यह भलीभाँति जानते हैं, वे मेरी प्रेमाभक्ति में लगते हैं और हृदय से मेरी पूजा करते हैं।