सारांश
कृष्ण भौतिक प्रकृति के तीन गुणों की व्याख्या करते हैं: सत्व (अच्छाई), रजस (जुनून), और तमस (अज्ञान)।
श्लोक 26
मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते । स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥
māṃ ca yo ’vyabhicāreṇa bhakti-yogena sevate | sa guṇān samatītyaitān brahma-bhūyāya kalpate ||
जो समस्त परिस्थितियों में अविचल भाव से पूर्ण भक्ति में प्रवृत्त होता है, वह तुरंत प्रकृति के गुणों को लांघ जाता है और ब्रह्म के स्तर तक पहुँच जाता है।