सारांश
कृष्ण मनुष्यों में पाए जाने वाले दैवीय और आसुरी गुणों का वर्णन करते हैं।
श्लोक 21
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः । कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् ॥
tri-vidhaṃ narakasyedaṃ dvāraṃ nāśanam ātmanaḥ | kāmaḥ krodhas tathā lobhas tasmād etat trayaṃ tyajet ||
इस नरक के तीन द्वार हैं—काम, क्रोध और लोभ। प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि इन्हें त्याग दे, क्योंकि इनसे आत्मा का पतन होता है।