अध्याय सूची

कर्मसंन्यासयोग

कर्म संन्यास योग

सारांश

कृष्ण कर्मों के त्याग के मार्ग की तुलना निस्वार्थ कर्म के मार्ग से करते हैं, और निष्कर्ष निकालते हैं कि साधक के लिए बाद वाला बेहतर है।

श्लोक 10

ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः । लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा ॥

brahmaṇy ādhāya karmāṇi saṅgaṃ tyaktvā karoti yaḥ | lipyate na sa pāpena padma-patram ivāmbhasā ||

जो व्यक्ति कर्मफलों को परमेश्वर को समर्पित करके आसक्ति रहित होकर अपना कर्म करता है, वह पाप कर्मों से उसी प्रकार अप्रभावित रहता है, जैसे कमल का पत्ता जल से अछूता रहता है।