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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushti-Vardhanam, Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat
विवरण
महामृत्युंजय मंत्र, जिसे त्र्यंबकम मंत्र भी कहा जाता है, ऋग्वेद (7.59.12) का एक श्लोक है जो त्र्यंबक, 'तीन आंखों वाले', रुद्र (शिव) को संबोधित है। इसका जाप दीर्घायु, अकाल मृत्यु को टालने और आध्यात्मिक मुक्ति के लिए किया जाता है।
📖 अर्थ
हम त्रिनेत्रधारी (भगवान शिव) की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी प्राणियों का पोषण करते हैं। जैसे ककड़ी अपनी बेल के बंधन से मुक्त हो जाती है, वैसे ही हम भी मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाएं और अमरता प्राप्त करें।
✨ लाभ
दीर्घायु, अच्छा स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से सुरक्षा प्रदान करता है।